पंचायतों के कामों की होगी ऑनलाइन मॉनिटरिंग


भोपाल. पंचायतों के विकास के लिए मिलने वाली राशि का अब दुरुपयोग नहीं किया जा सकेगा। इस पर अब राज्य सरकार की तीखी नजर रहेगी, जिससे कि पंचायतों के कामों में भ्रष्टाचार पर नकेल कसी जा सके। अब पंचायतों में होने वाले कामों की ऑनलाइन मोनिटरिंग होगी। यह सब कवायद राज्य सरकार वित्त आयोग की अनुशंसा करने पर जा रही है, जिससे कि पंचायतों में बेहतर तरीके से काम हो सके और वित्त आयोग की ओर से मिलने वाला अनुदान राशि का सदुपयोग हो सके। अब पंचायतों को मिलने वाली राशि से किसी भी प्रकार का स्थापना व्यय नहीं किया जा सकेगा। न तो वेतन दिया जा सकेगा और न ही मानदेय का भुगतान होगा। वित्त आयोग की अनुशंसा को देखते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सभी कलेक्टरों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को पत्र लिखा है। पत्र में साफ किया गया है कि 15वें वित्त आयोग की अनुशंसा के तहत पंचायतों को मिलने वाली राशि का केवल उसी प्रयोजन में उपयोग किया जाएगा, जिस प्रयोजन के लिए राशि आवंटित की गई है। विभाग ने यह भी साफ किया है कि टेंट किराया, सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकार्पण कार्यक्रम, एयर कंडीशनर, वाहन, बिजली बिल पर भी राशि खर्च नहीं की जा सकेगी। इतना ही नहीं किसी भी तरह के कार्यक्रम आयोजित करने पर स्वल्पाहार के लिए भी इस मद से राशि का उपयोग नहीं किया जा सकेगा। राज्य सरकार ने यह भी तय कर दिया है कि आयोग की अनुशंसा के तहत मिलने वाली राशि से किस तरह के काम कराए जा सकते हैं।


गुणवत्ता नियत्रण के लिए नए मानक तय


अब पंचायतों में होने वाले कामों का ऑन स्पॉट भौतिक सत्यापन के साथ ही संपादित कार्यों का ऑनलाइन ऑडिट भी किया जा सकेगा। आयोग ने पंचायतों में होने वाले कार्यों के गुणवत्ता नियंत्रण के लिए भी नए मानक तय किए हैं। तय मानकों के हिसाब से पंचायतों के कामों का प्राकलन उपयंत्री द्वारा तैयार किया जाएगा और सहायक यंत्री द्वारा तकनीकी स्वीकृति जारी की जाएगी। ऐसे कार्य जो मनरेगा से कराए जा सकते हैं, उनकी तकनीकी स्वीकृति भी सहायक यंत्री जारी करेंगे। यह भी साफ किया गया है कि स्वच्छता और पेयजल संबंधी कार्यों की मॉनिटरिंग स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के जिला समन्वयक एवं ब्लॉक समन्वयक करेंगे। साथ ही वे प्लानिंग में भी सहयोग करेंगे। यह भी व्यवस्था की गई है कि कार्यों का भौतिक निरीक्षण एवं गुणवत्ता परीक्षण पंचायत समन्वय अधिकारी, उपयंत्री, सहायक यंत्री एवं अन्य अधिकृत अधिकारियों द्वारा नियमित रूप से किया जाएगा। यह भी निर्देश दिए गए हैं कि उपयंत्री द्वारा प्रत्येक निर्माण कार्य का मूल्यांकन माप पुस्तिका में दर्ज किया जाएगा एवं कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र पर सरपंच, सचिव, उपयंत्री, सहायक यंत्री के हस्ताक्षर कर जिला एवं जनपद पंचायत स्तर पर संधारित किया जाए। यह भी ताकीद किया गया है कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला और जनपद पंचायत द्वारा अपूर्ण निर्माण कार्यों की समीक्षा नियमित रूप से की जाए।


काम अधूरा तो फिर नए काम की मंजूरी नहीं


पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने 15वें चित आयोग की अनुशंसा पर मिली राशि से पंचायतों में होने वाले कामों के सुपरविजन की भी व्यवस्था की है। नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक निर्माण कार्य की प्रविष्टि कार्य स्वीकृति के साथ ही ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अनिवार्य रूप से की जाएगी। इतना ही नहीं प्रत्येक निर्माण कार्य के शुरू के समय, कार्य की प्रगति के दौरान क्या कार्य पूर्ण होने के तत्काल बाद जियो टेग फोटो एम - एक्शनसॉफ्ट पर अपलोड किया जाना अनिवार्य होगा। प्रत्येक खर्च का बिल, वाउचर भी मेंटेन करना होगा। ग्राम पंचायत में बीते 6 माह से अधिक अवधि के अपूर्ण कार्य लंबित रहने पर नए कार्य स्वीकृत नहीं किए जा सकेंगे। यह भी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है कि निर्माण कार्य में मनरेगा योजना के तहत अनुमति प्राप्त कार्यों के साथ प्रभावी कन्वर्जेंस एवं उनका सोशल ऑडिट भी किया जाए। प्राय: देखने में आता है कि पंचायतों में या तो काम अपूरे पड़े रहते हैं या फिर गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जाता। इसलिए अब निगरानी की दोहरी व्यवस्था होगी।