इस अनोखे गांव के हर घर में हैं जुड़वां बच्चे


किसी शायर ने क्या खूब कहा है, ''तेरी सूरत से नहीं मिलती किसी की सूरत, हम जहां में तेरी तस्वीर लिए फिरते हैं...'' लेकिन केरल में एक गांव ऐसा है जो इस बात को झूठ साबित कर रहा है क्योंकि यहां चार सौ से ज्यादा लोग ऐसे हैं, जिनके जुड़वां चेहरे इस गांव में ही मौजूद हैं। केरल के कोच्चि शहर से करीब 150 किलोमीटर के फासले पर स्थित कोडिन्ही गांव के कारण पूरी दुनिया के वैज्ञानिक सकते में हैं कि ऐसा क्या है इस गांव की आबो हवा में कि यहां पैदा होने वाले जुड़वां बच्चों का औसत सारी दुनिया के औसत से सात गुना ज्यादा है।



इस गांव में पैदा होने वाले जुड़वां बच्चों की तादाद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तकरीबन दो हजार लोगों की आबादी वाले इस गांव के हर घर में जुड़वां बच्चे हैं। यहां नवजात जुड़वां बच्चों से लेकर बुजुर्ग जुड़वां तक मौजूद हैं। वैज्ञानिक इस राज समझने में लगे हैं कि इस गांव में दुनिया में जुड़वां बच्चों के औसत से आखिर सात गुना ज्यादा जुड़वां बच्चे आखिर कैसे पैदा होते हैं। आम तौर पर दुनिया भर में 1,000 में मात्र छह ही जुड़वां बच्चे पैदा होते हैं, जबकि यहां हर 1,000 बच्चों में 42 जुड़वां पैदा होते हैं।
गांव में एक साइनबोर्ड पर लिखा है कि भगवान के अपने जुड़वां गांव, कोडिन्ही में आपका स्वागत है। दुनियाभर में इस शहर को जुड़वां गांव के नाम से ही जाना जाता है। इस गांव की 85 फीसदी आबादी मुस्लिम है, लेकिन ऐसा नहीं कि हिन्दू परिवारों में जुड़वां पैदा नहीं होते। स्थानीय लोग बताते हैं कि जुड़वां बच्चों का सिलसिला यहां करीब 60 से 70 साल पहले शुरू हुआ। गांव के सरपंच का कहना है, 'यहां ७० बरस की जुड़वां बहनें हैं, जिन्हें यहां का सबसे बड़ी उम्र का जुड़वां कहा जा सकता है। किसी दूसरे गांव की लड़की यहां ब्याह कर आती है तो उनके भी जुड़वां बच्चे पैदा होते हैं। यह तो अल्लाह की देन है।Ó गांव में रहने वाली पथूटी और कुन्ही पथूटी सबसे ज्यादा उम्र की जुड़वां बहनें हैं। इनकी उम्र करीब 70 साल है और वे इसे किसी करिश्मे से कम नहीं मानतीं। पथूटी कहती हैं, 'यह तो ईश्वर की मेहर है और कुछ नहीं। विज्ञान कुछ भी साबित नहीं कर सकता। अब तो हम एक साथ तीन-तीन, चार-चार बच्चे पैदा होते देख रहे हैं। इस सब की वजह आज तक कोई नहीं जान पाया। इस गुत्थी को समझने के लिए कुछ समय पहल भारत, जर्मनी और ब्रिटेन का एक संयुक्त अध्ययन दल यहां आया था और उन्होंने यहां के लोगों के डीएनए का अध्ययन करने के लिए कुछ नमूने एकत्र किए। इसी तरह बहुत से दल यहां आते हैं और अपनी जिज्ञासा शांत करने के लिए यहां के लोगों के चेहरे मोहरे, यहां की आबोहवा, खान पान और अन्य तमाम तरह के अध्ययन करते हैं, लेकिन जुड़वां बच्चे पैदा होने की कोई वजह आज तक मालूम नहीं हो पाई। 
केरल के कोडिन्ही जैेसे दुनिया में दो और गांव हैं, नाईजीरिया का इग्बो ओरा और ब्राजील का कैंडिडो गोडोई। यहां भ्ीा वैज्ञानिकों ने जुड़वां बच्चों की प्रक्रिया को समझने की कोशिश की। नाइजीरिया में पाया गया कि वहां मिलने वाली एक सब्जी के छिलके में रसायन की अधिक मात्रा के कारण ऐसा हुआ है। वहीं ब्राजील वाले मामले में शोधकर्ताओं को कहना है कि उस समुदाय में सब आपस में ही शादी करते हैं और वहां शायद इसलिए ऐसा होता है, लेकिन कोडिन्ही का मामला अब भी चुनौती बना हुआ है।