हरियाली अमावस्या का प्रकृति, पितर, भगवान शिव और पार्वती से हैं संबंध


सावन महीने की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को हरियाली अमावस्या कहते हैं। इस अमावस्या का संबंध प्रकृति, पितर और पार्वती पति शिवशंकर से है। इहलोक, परलोक और शिवलोक से संबंध होने के कारण इस अमावस्या का अपना विशेष महत्व है। इस वर्ष हरियाली अमावस्या पर विशेष शुभ संयोग बने हैं जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है।
ज्योतिषशास्त्र की गणना के अनुसार 1 अगस्त को हरियाली अमावस्या के दिन दोपहर 12 बजकर 12 मिनट तक गुरु और पुष्य नक्षत्र के संयोग से गुरुपुष्य योग बना है। इसके साथ ही इस सभी प्रकार की सिद्धि प्रदान करने वाला सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत पुष्य योग और सिद्धि योग भी बना है। ऐसे में इस अवसर को व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए इसदिन महज 4 काम करके आप अपने जीवन में गुडलक ला सकते हैं।



शिव पार्वती की पूजा
सावन का संबंध भगवान शिव और देवी पार्वती से है। इस अमावस्या के दिन देवी पार्वती के संग भगवान शिव की पूजा का विधान है। कुंवारी कन्याओं को विवाह में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए शिव और पार्वती को लाल वस्त्र लपेटकर उनका फल और मिष्टान से पूजन करना चाहिए। सुहागन स्त्रियों को सिंदूर सहित देवी पार्वती की पूजा करनी चाहिए और सुहाग सामग्री बांटना चाहिए। हरी चूडिय़ा, सिंदूर, बिंदी बांटने से सुहाग की आयु लंबी होगी साथ ही घर में खुशहाली आएगी। गुडलक के लिए लड़के भी चूडिय़ां, मिठाई सुहागन स्त्रियों को गिफ्ट कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि यह काम दोपहर से पहले कर लें।


राशि के अनुसार पौधे लगाएं
हरियाली अमावस्या मनुष्य को प्रकृति से जोडऩे का पर्व है। इस दिन किसी वृक्ष को कष्ट ना दें। अपने गुडलक के लिए आपको राशि के अनुसार वृक्षारोपन करना चाहिए। अगर राशि से संबंधित पौधा ना मिले तो तुलसी, आम या शमी का पेड़ लगा सकते हैं। राशि के अनुसार पौधा लगाना हो तो मेष राशि वाले लाल चंदन या आंवले का पेड़ लगाएं, वृष राशि वाले जामुन या सप्तपर्ण लगाएं, मिथुन राशि वाले खैर या कटहल लगाएं, कर्क राशि वाले पलाश या पीपल लगाएं, सिंह राशि वाले बडग़द लगाएं, कन्या राशि वाले रीठा लगाएं, तुला राशि वाले अर्जुन का पेड़ लगाएं, वृश्चिक राशि वाले अमरूद, धनु राशि वाले को साल का पेड़ लगाना चाहिए, मकर और कुंभ राशि वाले को शमी, मीन राशि वाले आम का पेड़ लगाएं।
पितरों की करें पूजा
अमावस्या के दिन अपने पूर्वजों का ध्यान जरूर करना चाहिए। अपने पूर्वजों का ध्यान करते हुए किसी जरूरतमंद कोई वस्तु दान कर दें या किसी भूखे व्यक्ति को भोजन कराएं। पीपल में जल देना भी शुभ होगा। पिता से आशीर्वाद लें।
भगवान विष्णु की पूजा
गुरुवार को गुरुपुष्य योग में हरियाली अमावस्या है इसलिए इस दिन मोक्ष प्रदान करने वाले भगवान विष्णु की पूजा घी का दीप जलाकर पीले चंदन और पीले फलों से करें। पूजन के बाद गीता या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। भगवान से प्रार्थना करें कि आपके पितरों और पूर्वजों को सद्गति प्रदान करें। इस तरह पितरों के लिए की गई प्रार्थना आपके लिए गुडलक लाएगी।
श्रावण अमावस्या का महत्व
हिन्दू मान्यताओं में अमावस्या या अमावस की सर्वाधिक धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व दिया गया है। वैसे तो हर महीने अमावस्या आती है, लेकिन श्रावण मास की अमावस भगवान शिव शंकर के प्रिय महीने सावन में आती है। इसलिए इस दिन विशेष रूप से पूजा-पाठ और दान-पुण्य किया जाता है। सावन के महीने में चारों ओर हरियाली होने की वजह से इसे हरियाली अमावस्या भी कहा जाता है। इस अमावस्या के दो दिन बाद हरियाली तीज आती है। 
हरियाली तीज पर शिव को प्रिय हैं फूल
पौराणिक कथाओं के अनुसार शिव और पार्वती ऐसे दंपती हैं जो भारतीय परिवार व्यवस्था का प्रतिनिधि उदाहरण है। शिव और पार्वती के बीच पति-पत्नी के साथ-साथ मित्र का भी संबंध हैं। इसीलिए किसी और दैवीय दंपती की इस तरह से पूजा नहीं की जाती है, जिस तरह से शिव और पार्वती की। शिव और पार्वती दोनों प्रकृति के बहुत समीप हैं, इसलिए इनकी पूजा में कुछ खास प्रयास नहीं करने होते हैं। फिर भी कुछ फूल ऐसे हैं जो शिव को प्रिय हैं और कुछ फूल पार्वती को प्रिय हैं।
भोलेनाथ के प्रिय फूल
शिव को प्रसन्ना करने के लिए शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाता है, उन्हें दूध से भी नहलाया जाता है। मगर यदि भक्त उन्हें विभिन्ना तरीकों के फूल व पत्तियां अर्पित करते हैं तब भी भोलेनाथ मनोकामनाओं की पूर्ति करते हैं। इन सभी भोलेनाथ के प्रिय फूल का अपना अलग ही महत्व होता है। आज हम आपको बताएंगे कि, भगवान भोलेनाथ के प्रिय फूल व किस फूल को अर्पित करने से क्या लाभ होता है। धतूरे का धार्मिक के साथ ही औषधीय महत्व भी होता है। इसके बीज से लेकर जड़, तना, फल, फूल व रस तक कई बीमारियों को दूर करने में सहायक होते हैं। शंकर जी को चढ़ाए जाने वाले फूलों में धतूरा प्रमुख है। जो नि:संतान है उन्हें संतान प्राप्ति के लिए भोलेनाथ को धतूरा अर्पित करना चाहिए।
दूब
दूब या दुर्वा यूं तो एक तरह की घास ही है। मगर हिंदू मान्यता के अनुसार इसका धार्मिक महत्व है। आमतौर पर गणेशोत्सव के दौरान गणपति बाबा को दुर्वा अर्पित की जाती है। लेकिन गणेश की तरह ही उनके पिता शिव जी को भी दुर्वा प्रिय है और उन्हें एक लाख दुर्वा चढ़ाने से उम्र लंबी होती है।
बिल्व पत्र
बिल्व पत्र या बेल पत्र की महत्ता भगवान भोलेनाथ की वजह से ही है। बेल पत्र के पेड़ को शिवद्रुम के नाम से भी जाना जाता है। सभी भक्त खास अवसरों पर भोलेनाथ को बेलपत्र अर्पित करते हैं, क्योंकि ऐसा करने से सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।