शिव-राज में हुआ करोड़ों का बस अधिग्रहण घोटाला

सनव्वर सफी
भोपाल। शिवराज सरकार में हुए पार्टी कार्यक्रमों में कार्यकर्ताओं और लोगों को लान-ले जाने के लिए बसों का अधिग्रहण किया गया। इन अधिग्रहित बसों के भुगतान में करोड़ों रुपए का घोटाला सामने आया है। इस घोटाले में आरटीओ अफसरों की मिलीभगत भी सामने आई है। कार्यक्रमों में अधिग्रहित हुईं बसों के पेमेंट के लिए फर्जी बिलों का सहारा लिया गया और आरटीओ अधिकारियों ने अपना कमिशन सेट कर इन बिलों को बिना किसी जांच करे पास कर दिया।



अधिकारियों द्वारा पास किए गए बिलों के आधार पर इन बसों के संचालकों को भुगतान भी किया जा चुका हैं। दरअसल, शिवराज शासनकाल में साल 2016 से लेकर 2018 में प्रदेशभर में हुए करीब 32 कार्यक्रमों में करोड़ों रुपए का घोटाला हुआ है। इन सभी आयोजनों को सफल बनाने के लिए प्रदेशभर के पार्टी कार्यकर्ताओं को लाने-ले जाने के लिए बसों का अधिग्रहण किया गया। इन बसों के भुगतान के लिए कलेक्टर ने 12 सीटर, 22 सीटर, 32 सीटर और 52 सीटर कैपेसिटी के आधार पर गाइडलाइन भी तय की थी, लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत से गाइडलाइन की धज्जियां उड़ाते हुए फर्जी बिलों के आधार पर भुगतान करा कर करोड़ों रुपए की चपत लगाई गई। इन फर्जी बिलों में बसों की जगह ट्रक का नंबर भी डाल दिया, तो 12 सीटर, 22 सीटर और 32 सीटर बसों के बिल भी 52 सीटर कैपेसिटी के आधार पर पास किए गए। वहीं एक ही व्यक्ति की दस ट्रेवल्र्स एजेंसी को भी करोड़ों रुपए का भुगतान बसों के अधिग्रहण के नाम पर किया गया, जबकि इन दस ट्रैवल्स एजेंसी में एक ट्रैवल्स एजेंसी आरटीओ में रजिस्टर्ड है फिर इन ट्रैवल्स एजेंसी के बिलों को पास कर अधिग्रहण का पैसा दिया गया। 
बसों के बिल में शामिल ट्रक के नंबर 
साल 2017 में पार्टी द्वारा जिला स्तरीय किसान सम्मेलन का आयोजन आष्टा जिला सीहोर में कराया गया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए पार्टी के कार्यकर्ताओं और किसानों को लान-ले जाने के लिए बसों का अधिग्रहण किया गया। इस कार्यक्रम में लगाई गईं बसों के भुगतान के लिए रूपेश सिंह बघेल ने फर्जी बिल का सहारा लिया। बघेल ने बिल में बताया कि उन्होंने इस कार्यक्रम में 26 बसें लगाई हैं और उन्हें चार लाख रुपए का भुगतान किया जाए। बघेल ने बिल में एमपी 14 एचए 0108 नंबर की बस बताई और आरटीओ में इस नंबर से बस नहीं ट्रक रजिस्टर्ड है, फिर भी भुगतान किया जा चुका है। 
बस लगाई नहीं और फर्जी वाहन नंबर डालकर पाया भुगतान 
किसान सम्मेलन हो या मुख्यमंत्री की भ्रमण यात्रा, सभी आयोजनों में अधिग्रहित हुईं बसों के भुगतान के लिए एजेंटों ने फर्जी बिलों के माध्यम से पेमेंट पाया है। एजेंटों ने इन कार्यक्रमों में बसें तो लगाई नहीं और बिल फर्जी वाहन नंबरों के आधार पर बनाकर दिए। इन फर्जी बिलों को अधिकारियों से सांठ-गांठ कर पास कराकर राशि भी ले ली। एजेंटों द्वारा लगाए गए बिलों में बसों के ऐसे नंबर बता गए हैं जोकि आरटीओ में रजिस्टर्ड ही नहीं। इन बिलों में अंकित बसों के नंबरों को आरटीओ की वेबसाइट पर चैक करने पर नो रिकॉर्ड बता रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है जब कोई नंबर आरटीओ की साइट पर नो रिकॉर्ड दिखता है तो इसका मतलब है कि वाहन आरटीओ में रजिस्टर्ड ही नहीं हुआ है। 
एक व्यक्ति की नौ फर्जी ट्रैवल एजेंसी
तीन साल में हुए भाजपा के सभी कार्यक्रमों में एक ही व्यक्ति की ९ फर्जी ट्रैवल्स एजेंसी को बसों के अधिग्रहण के नाम पर ही करोड़ों रुपए का भुगतान किया गया। इन एजेंसियों में अपूर्व ट्रैवल्स, पुष्प ट्रैवल्स, बघेल टूर एंड ट्रैवल्स, बघेल एसोसिएट्स, रूपेश सिंह और लौह पुरुष ट्रैवल्स शामिल हैं, जबकि आरटीओ के रिकॉर्ड में इनमें से एक भी ट्रैवल्स एजेंसी पंजीकृत नहीं हुई हैं। 
इन कार्यक्रम में हुआ घोटाला
जन जागरण एवं गरीब कल्याण, किसान सम्मेलन, भावांतर योजना, सद्गुरु कबीर  महोत्सव,  मुख्यमंत्री भमण यात्रा, कृषक समृद्धि योजना, राज्य स्तरीय स्वच्छता समारोह, सिंचाई परियोजना लोकार्पण, पंचायत दिवस और संबल योजना कार्यक्रमों में बसों का अधिग्रहण किया गया। इन कार्यक्रमों में लगाई गईं बसों के भुगतान में करोड़ों रुपए का घोटाला हुआ है।