5 हजार वनकर्मियों को पदोन्नति का इंतजार

डिप्टी रेंजरों को रंज का चार्ज देकर प्रमोशन देना भूला विभाग 


रेंज का प्रभारी बनने के बाद नाकेदार और फॉरेस्टर का प्रमोशन अटका


सब संवाददाता भोपाल


प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण का मामला कर्मचारियों के लिए मुसीबत बना हुआ है। ऐसे में वन विभाग ने रेंजरों के पदों पर डिप्टी रेंजरों का प्रभार दे दिया है। रेंज का प्रभार मिलने के बाद डिप्टी रेंजरों ने प्रमोशन को चाह छोड़ दी है। डिप्टी को रेंज का तो प्रभार मिल गया है मगर वनक्षेत्रपाल और उपवनक्षेत्रपाल का प्रमोशन का अटक गया है। विभागीय विसंगतियों को मार झेल रहे डिप्री रेंजर अब फीलगुड में ,वहीं वनक्षेत्रपाल और उपवनक्षेत्रपाल प्रमोशन की चाह में रिटायर हो गए हैं। इधर डिप्टी रेंजरों को रेंज का चार्ज मिल गया है तो वे भी प्रमोशन की मांग नहीं कर रहे हैं। इसका सीधा असर वनक्षेत्रपाल, उपवनक्षेत्रपाल और वनपाल पर पड़ रहा है। उन्हें न तो प्रमोशन मिल रहा है और न ही अस्थाई प्रमोशन। सिर्फ उनके कार्य समय में बढ़ोतरी की जा रही है। लंबे समय से ही कोर्ट और सरकार के आरक्षण के मामले में कर्मचारी पिसते आ रहे हैं। अब विभाग और डिप्टी रेंजरों ने भी दूरी बना ली है। प्रशासन-दो शाखा के अफसरों का कहना है कि विभागीय विसंगतियों के चलते हजारों वनकर्मियों का प्रमोशन अटका हुआ है। प्रदेश के नेशनल पार्क और फॉरेस्ट में तैनात 5 हजार के ज्यादा कर्मचारियों को प्रमोशन मिलना है मगर सरकार प्रमोशन में आरक्षण के मुद्दे पर 11 महीने बाद कोई नया फॉर्मुला नहीं ला सकी। विधानसभा की कमेटी, कैबिनेट सब कमेटी और आला अफसर भी कोई तोड़ नहीं निकाल पाए। इन समितियों ने न तो एजेंडा तय किया और न ही बैठक की। अब मार्च 2020 में थोक में कर्मचारी बिना प्रमोशन का लाभ लिए रिटायर हो जाएंगे। एक अप्रैल के बाद उन्हें फायदा नहीं मिल पाएगा। इससे अधिकारी-कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। इस मामले में राज्य के 9 लाख से ज्यादा कर्मचारी प्रभावित होंगे। बता दें कि अधिकारी कर्मचारियों की नाराजगी दूर करने के लिए पिछली भाजपा सरकार ने 2018 में रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ाकर 62 कर दी थी। अप्रैल 2020 में इनकी आयु 62 साल कर दी गई। इस दायरे में करीब डेढ़ हजार अधिकारीकर्मचारी है। वहीं पूरे साल में तकरीबन 15 हजार कर्मचारी सेवानिवृत्त होंगे। ऐसे में सरकार की चिंता इस बात पर बड़ी है कि प्रमोशन के बिना अधिकारी कर्मचारियों का रिटायरमेंट हुआ तो नाराजगी का सामना कैसे होगा। 


कर्मचारियों से किया वादा वनमंत्री भले


वनमंत्री का पद संभालने के बाद अंग सिधारने कर्मचारी और संगठनों से वादा किया था कि वे विभागीय विसंगतियों को दूर करेंगे नौ महीने बीते चुके हैं मार सरकार के ववन-फा और वनमंत्री ने खुद किए वादों को अलग रख दिया है। सिर्फ मामला फाइलों में टी अटका हुआ है। जमीनी हकीकत में कर्मचारियों को कुछ भी बसिल नहीं हुआ है। प्रमोशन की चाह में रियर हो रहे हैं और वनमंत्री ने भी प्रमोशन को लेकर कोई कदम नहीं उठाया है।


मांग पर सिर्फ आश्वासन और खाली हाथ


वनकर्मियों ने शिवराज सकार में अनिश्चितकालीन हड़ताल से प्रदेश में जंगलों की सुरक्षा की पोल खोल दी थी। कर्मचारियों की हड़ताल ने आईएफएस से लेकर वनमंत्री को भी हलाकान कर दिया था। तत्कालीन सरकार ने उन कर्मचारी संगठन की मांगों को पूरा करने का वादा किया था मगर पूरा नहीं हुआ था कांग्रेस सरकार ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में वनकर्मियों की लंबित मांगों को अपने एजेंडे में शामिल किया था। अब तिति यह है कि सिर्फ सरकारी आस्वासन दिया जा रहा है और कर्मचारी खाली या हैं।