साल में 2 बार सीधे मूर्ति पर पड़ती है सूर्य की पहली किरण



आंध्रप्रदेश में श्रीकाकुलम जिले के अरसावल्ली गांव से करीब 1 किमी पूर्व दिशा में भगवान सूर्य का मंदिर है। जो करीब एक हजार साल से ज्यादा पुराना मंदिर है। पद्मपुराण के मुताबिक कश्यप ऋषि ने यहां भगवान सूर्य की मूर्ति स्थापित की थी। अन्य धर्म ग्रंथों के अनुसार इंद्र ने यहां भगवान सूर्य की मूर्ति स्थापित की। माना जाता है कि ये देश का एकमात्र ऐसा सूर्य मंदिर है जहां आज भी पूरे विधि-विधान से भगवान सूर्य की पूजा की जाती है। ये भी मान्यता है कि इस मंदिर में 43 दिनों तक सूर्य नमस्कार करने के साथ ही इंद्र पुष्करणी कुंड में नहाने से आंखों और स्किन की बीमारियों में राहत मिलती है।

पत्नियों के साथ पूजे जाते हैं भगवान

इस मंदिर में लंबे काले ग्रेनाइट पत्थर से कमल का फूल बना है। जिस पर भगवान आदित्य की 5 फीट ऊंची मूर्ति स्थापित है। इस मूर्ति का मुकूट शेषनाग के फन का बना हुआ है। यहां भगवान सूर्य की पूजा उनकी दोनों पत्नियों, उषा और छाया के साथ होती है।

7वीं शताब्दी में हुई मूर्ति स्थापना

पुरातत्व विशेषज्ञों का कहना है कि मंदिर में मौजूद पत्थर के शिलालेखों से ये बात पता चलती है कि कलिंग साम्राज्य के शासक देवेंद्र वर्मा ने ये मंदिर बनवाया था और 7वीं शताब्दी के शुरुआती सालों में भगवान सूर्य की मूर्ति यहां स्थापित की थी। शिलालेखों से ये भी मालूम पड़ता है कि यहां वैदिक विद्यार्थियों के लिए स्कूल बनवान के लिए लोगों ने जमीन दान की थी। ये जमीन राजा देवेंद्र वर्मा के उत्तराधिकारियों ने करीब 11वीं शताब्दी में दान की थी।

पंचदेव पूजा

इस मंदिर में पंचदेवों की मूर्तियां भी स्थापित है। इस कारण सौर, शैव, शाक्त, वैष्णव और गाणपत्य संप्रदाय के लोगों के लिए भी ये मंदिर खास है। यहां भगवान सूर्य की प्रमुख मूर्ति के अलावा भगवान विष्ण, गणेश और शिवजी के साथ अम्बिका के रूप में देवी दुर्गा की प्रतिमा भी स्थापित की हई है। सूर्य नारायण स्वामी मंदिर को खास तरह से बनाया गया है। इस मंदिर में साल में दो बार यानी मार्च और सितंबर में सूर्य की किरणें सीधे भगवान के चरणों पर पड़ती है। ये स्थिति सुबह-सुबह शुरुआती कुछ घंटों में बनती है। सूर्य की किरणें 5 मुख्य द्वारों से होकर गुजरती है।